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सूरजपुर जिला बाल संरक्षण टीम द्वार दो नाबालिको का बाल विवाह रुकवाया गया।

सूरजपुर जिला को बाल विवाह के दंश से कब मिलेगी मुक्ति।

सूरजपुर।  जिला सूरजपुर में कलेक्टर  एस. जयवर्धन के निर्देश पर बाल विवाह पर प्रशासन की टीम कड़ी नजर रख रही है। जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग सूरजपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने को अग्रसर है। जिला बाल संरक्षण  अधिकारी मनोज जायसवाल को दो अलग-अलग विकासखण्ड सूरजपुर एवं रामानुजनगर में सूचना प्राप्त हुई कि 16 वर्षीय लड़कियां जो ग्यारहवी कक्षा में अध्ययनरत हैं उसकी सगाई कर घर वाले विवाह करने वाले है।

सूचना के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने दोनो का सत्यापन स्कूलों से कराया और दोनो नाबालिकों की उम्र 16 वर्ष पाये जाने पर मौके पर दो टीमे भेजी गई और सगाई के समय ही सभी को समझाईस दी गई।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि छ.ग. शासन ने ग्राम पचांयत के समस्त सचिवों एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के समस्त पर्यवेक्षको को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी बनाया है। सभी की जिम्मेदारी है कि उनके ग्राम पंचायत एवं सेक्टर में बाल विवाह ना हो। एवं बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों के सम्बन्ध में जानकारी दी गई।

बाल विवाह प्रतिशेध अधिनियम 2006 के अन्तर्गत सजा के सम्बन्ध में भी बताया गया दोनो स्थानों में बालिकाओं को आगे की पढ़ाई जारी रखने और शिक्षा से ही सब कुछ प्राप्त होने की समझाईस दी गई। लड़की एवं परिवार वालो ने पहले पढाई फिर विदाई को स्वीकार किया और बालिका की शिक्षा को जारी रखने और उम्र हो जाने पर विवाह करने को तैयार हुए। इस आशय का पंचनामा एवं कथन लेकर विवाह को स्थगित करा दिया गया।

बाल विवाह रोकवाने वालों में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल, रामानुजनगर परियोजना अधिकारी सुश्री अनुराधा आर्या, सूरजपुर पर्यवेक्षक श्रीमति दीपा बैरागी, चाईल्ड लाईन से  दिनेश यादव, श्रीमती यशोदा गुप्ता, पुलिस विभाग से  शिवलोचन पैकरा, उपस्थित थे।

Afroj Khan

प्रधान संपादक रायपुर, छत्तीसगढ़

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