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9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी आंदोलन का असर सूरजपुर जिले मे दिखा, भटगांव और बिश्रामपुर के कोयला खदानो में उत्पादन प्रभावित हुआ।

 

सूरजपुर। देश के सभी प्रमुख श्रमिक संगठनों के द्वारा केंद्र सरकार की मजदूर, किसान, बेरोजगार युवाओ के विरोधी नीतियों के खिलाफ 9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी भारत बंद आंदोलन भटगांव मे सफल रहा। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए कोयला उद्योग तथा एसईसीएल भटगांव क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक संगठन इंटक,एचएमएस, एटक और सीटू के द्वारा व्यापक तैयारी की गई थी। चारों श्रमिक संगठन के नेताओं के द्वारा श्रमिकों से लगातार अपील की जा रही है जिसका असर देखने को मिला हड़ताल की वजह से श्रमिकों की उपस्थिति नगन्य रही तथा कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ।

श्रमिक संगठनों के द्वारा आयोजित भारत बंद राष्ट्रीय आंदोलन के मुख्य कारण है केंद्र और राज्य सरकारों की मजदूर और किसान विरोधी नीतियों का विरोध है। श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगे इस प्रकार है। केंद्र सरकार द्वारा बनाएं चार श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए, श्रमिक संगठनों का कहना है कि ये संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कुचलने वाली हैं सरकार से इन्हें वापस ले। सार्वजनिक उपक्रम के उद्योग, बैंक एवं बीमा क्षेत्र का निजीकरण बंद किया जाए,राष्ट्रीय मजदूरी न्यूनतम 26000 रुपए प्रति माह सुनिश्चित किया जाए, पुरानी पेंशन स्कीम को लागू किया जाए,बेरोजगारों दूर करने के लिए सभी खाली पदों पर भर्ती किया जाए,आम जनता पर टैक्स का बोझ कम किया जाए तथा शिक्षा और चिकित्सा को निशुल्क किया जाए,संविधान में लिखित जन अधिकारों की रक्षा किया जाए, कोयला उद्योग में एमडीओ, रिवेन्यू शेयरिंग एवं कमर्शियल मीनिंग को तत्काल बंद किया जाए, कोल इंडिया का शेयर बेचना बंद करें, सीएमपीडीआई को कोल इंडिया से अलग करने के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए,ठेका श्रमिकों के लिए एचपीसी वेतन एवं मेडिकल सुविधा लागू करें, रिटायर कर्मचारियों को एक जनवरी 2017 से 20 लख रुपए ग्रेचुटी दिया जाए,भटगांव भूमिगत खदान का सी टी ओ विस्तार आदेश तत्काल मंगाई जाए,रिटायर्ड कर्मचारियों को रिवाइज्ड पेंशन लागू करें, रिटायर्ड कर्मचारियों का अर्जित अवकाश का भुगतान जल्दी किया जाए, भटगांव क्षेत्र के श्रमिक आवासों में पानी का सिपेज़ हो रहा है उसका मरम्मत कराया जाए, मार्च 2024 के बाद भटगांव में गम बूट तथा टोपी का वितरण नहीं हुआ है उसे तत्काल कराया जाए, भटगांव हॉस्पिटल में महिला चिकित्सक की नियुक्ति की जाए,भटगांव क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को सत्यापित सेवा पुस्तिका की एक प्रति दी जाए सहित कई श्रमिक तहसील मांगे हैं जिसको लेकर के आंदोलन किया जा रहा है।

श्रमिक संगठनों का मानना है कि सरकार की नीतियों से मजदूरों और किसानों के हितों को खतरा है और वे इसके खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। यह आंदोलन देश भर में श्रमिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

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