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बच्चों पर असाधारण रिपोर्टिंग के लिए प्रतापपुर के राकेश मित्तल को यूनिसेफ ने किया सम्मानित 

विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत के मुख्य आतिथ्य में रायपुर में कार्यक्रम के दौरान 40 पत्रकारों को मिला सम्मान

अम्बिकापुर। यूनिसेफ ने सोमवार को प्रतापपुर के राकेश मित्तल को बच्चों और महिलाओं पर असाधारण रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में चालीस लोगों को पुरस्कृत किया गया जिनमें प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के रिपोर्टर, स्ट्रिंगर, फोटो जर्नलिस्ट और कैमरा पर्सन शामिल हैं।

बाल अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी वकालत करने के लिए कुशाभव ठाकरे विश्वविद्यालय और एमएसएसवीपी के सहयोग से यूनिसेफ द्वारा मीडिया4चिल्ड्रन अवार्ड्स शीर्षक वाले पुरस्कार दिए जाते हैं।

बाल और महिला अधिकारों के प्रति ज्यादा से ज्यादा लोगों को मीडिया के माध्यम से सजग करने,पत्रकारों को युनिसेफ से जोड़ने और उनकी भूमिका सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूनिसेफ मीडिया 4 चिल्ड्रन नाम से प्रदेश के पत्रकारों को विभिन्न क्षेत्रों में सम्मानित करती है।इसी के तहत सोमवार को रायपुर में एक समारोह के दौरान प्रतापपुर के पत्रकार राकेश मित्तल को फेलोशिप देकर सम्मानित किया गया।वे बच्चों और महिलाओं के अधिकारों,उनसे जुड़ी परेशानियों,कुपोषण व अन्य मामलों की खबरें प्रकाशित करते हैं जिससे बच्चों और महिलाओं को राहत भी मिलती है। समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान करते हुए छत्तीसगढ़ विधान सभा के अध्यक्ष चरणदास महंत ने कहा कि जीवन रक्षक सूचनाओं का प्रसार करने और जनता को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।मीडिया 4 चिल्ड्रन पुरस्कार राज्य में बच्चों और महिलाओं के कल्याण को बढ़ावा देंगे। मैं पोषण, स्वास्थ्य और सुरक्षा में यूनिसेफ के काम की सराहना करता हूं और राज्य में उनके प्रयासों को समर्थन देने का आश्वासन देता हूं।यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख जॉब जकरिया ने कहा कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि मीडिया ने छत्तीसगढ़ में बच्चों की भलाई में सुधार करने में मदद की है। “मीडिया ने परिवारों में पहले छह महीनों के लिए केवल स्तनपान, साबुन से हाथ धोना, बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करना और सभी द्वारा शौचालय का उपयोग करने जैसे बच्चों के अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा दिया है। परिवारों में ये प्रथाएं बच्चों की मृत्यु, बीमारियों, कुपोषण और एनीमिया को रोकेंगी।जकरियाह ने बाल श्रम और बाल विवाह को कम करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि मीडिया परिवारों और समुदायों में सामाजिक परिवर्तन ला सकता है जिससे बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि मीडिया बच्चों से जुड़े मुद्दों को नीति और निर्णय के केंद्र में भी ला सकता है।यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ श्याम सुधीर बांदी ने कहा कि यूनिसेफ क्षमता निर्माण के लिए राज्य भर में मीडिया के साथ काम कर रहा है और पत्रकारों और स्ट्रिंगर्स को महिलाओं और बच्चों पर रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार और फेलोशिप राज्य में बाल अधिकारों पर चर्चा के लिए मीडिया के अथक समर्थन की सराहना और मान्यता का प्रतीक है।पत्रिका के सम्पादक राजेश लाहोटी ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि खबरें कितनी असरदार होती हैं,इन उदाहरणों से समझा जा सकता है।किसी को भी इंसाफ और अधिकार दिलाने में पत्रकार और खबरों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।इस दौरान सुभाष धुप्पड अध्यक्ष रायपुर विकास प्राधिकरण,गौरव द्विवेदी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार रुचिर गर्ग,यूनिसेफ के डी श्याम कुमार,मनोज भारती व अन्य उपस्थित थे।

पांच पुरस्कारों के लिये 120 से अधिक प्रविष्टियां…

 

यूनिसेफ से मिली जानकारी के अनुसार पुरस्कारों ने 5 श्रेणियों में राज्य भर से 120 से अधिक प्रविष्टियों को आकर्षित किया था,प्रिंट मीडिया श्रेणी में हिंदी और अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र शामिल थे। प्रविष्टियों का मूल्यांकन मीडिया, शिक्षा जगत, सरकार और नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली एक जूरी द्वारा किया गया था।प्रिंट मीडिया श्रेणी में पुरस्कार पाने वालों में गार्गी वर्मा (द न्यू इंडियन एक्सप्रेस), जॉन राजेश पॉल, दैनिक भास्कर के अमिताभ अरुण दुबे, आकाश श्रीवास्तव (पत्रिका), अभिषेक बनर्जी (नव भारत), सत्यपाल सिंह राजपुर (लल्लूराम), शिखर देवांगन हैं। (ज़ी छत्तीसगढ़, सिद्धांत शर्मा (रेडियो मिर्ची) खुशबू सोनी (मध्यम डिजिटल) और शैक समीर ने फोटोग्राफी पुरस्कार जीते।पुरस्कारों के अलावा, महिलाओं और बच्चों पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए स्ट्रिंगर्स और रिपोर्टर्स को 15 फैलोशिप प्रदान की गईं।पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार शामिल है।COVID-19 महामारी के दौरान अनाथ बच्चों पर दैनिक भास्कर की कहानियों के जॉन राजेश पॉल और अमिताभ अरुण दुबे की स्वास्थ्य की कहानियों ने राज्य में महिलाओं और बच्चों की भलाई में बहुत योगदान दिया है। बस्तर क्षेत्र में बच्चों पर गार्गी वर्मा की अंतर्दृष्टिपूर्ण और रचनात्मक रिपोर्ट के परिणामस्वरूप उन्हें प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं।अध्यक्ष ने 2022 में विश्व बाल दिवस समारोह में उनके योगदान के लिए सोशल मीडिया प्रभावित करने वालों को भी सम्मानित किया। युवा प्रभावितों द्वारा बनाई गई इंस्टाग्राम रील्स ने देश भर में लाखों लोगों तक बाल अधिकार पहुंचाए। बस्तर के तोकापाल के खेमेश्वर सेतिया ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले को बालिका शिक्षा के महत्व के बारे में बताया, सोहिल अग्रवाल और डोमेंद्र निषाद ने द्वितीय व तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया।

 

राजनेता बच्चों के मुद्दे शामिल करें चुनावी घोषणा पत्र में..

सम्मान कार्यक्रम से पहले यूनिसेफ के अधिकारियों और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आये स्वयं सेवी संगठनों के लोगों के बीच बच्चों और महिलाओ से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई तथा इनके लिए धरातल पर और बेहतर कैसे कर सकते हैं,पर सबने अपनी राय रखी।इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इस विषय पर हुई कि राजनेताओं की मानसिकता बच्चों के हितों के प्रति बनानी है और इसके लिए जरूरी है कि हम प्रयास करें कि प्रदेश में हर राजनीतिक पार्टियां चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों से जुड़े मुद्दों को शामिल करें और ताकि सरकार में आने के बाद वे इसे प्रदेश में लागू करें।इस दौरान इसकी रूपरेखा तैयार की और निर्णय लिया कि यूनिसेफ से जुड़े अधिकारी, एनजीओ के लोग अपने अपने क्षेत्रों में बड़े राजनेताओं से सम्पर्क करेंगे और चुनाव में बच्चों की महत्ता देखते हुए उनसे जुड़े मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल करें।इससे ये फायदे होंगे कि राजनेताओं का जुड़ाव सीधे बच्चों और उनकी जरूरतों से होगा तथा शासन द्वारा लागू की जाने वाली योजनाओं का सीधा लाभ बच्चों को मिलेगा और उनका भविष्य बेहतर होगा।

Afroj Khan

प्रधान संपादक रायपुर, छत्तीसगढ़

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