
15 अगस्त,स्वतंत्रता दिवस और जुमा का अद्भुत संयोग_अफरोज खान
15 अगस्त,जश्ने आजादी,स्वतंत्रता दिवस देश का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है,स्वतंत्रता आंदोलन और जुमा (शुक्रवार) का दिन और भारत के इतिहास में अद्भुत संयोग है। इस वर्ष 2025 मे आजादी का 79 वॉ जश्न हम सब मना रहे हैं जो शुक्रवार अर्थात जुमा के दिन है। आप सबको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि 15 अगस्त 1947 के दिन जब देश आजाद हुआ था उस दिन भी जुमा (शुक्रवार) था। हम सब भलीभांति जानते हैं लाखों स्वतंत्रता सेनानियों अहिंसक आंदोलन और क्रन्तिकारीयों के बलिदान के बाद हमारा मुल्क हिदुस्तान 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हुआ था। 15 अगस्त 1947 दिन शुक्रवार (जुमा) के दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा कर लाखों हिंदुस्तानयों के साथ आजादी का पहला जश्न मनाया था। तब से लेकर आज तक हम सभी 15 अगस्त को बड़े गर्व के साथ अपने आजादी का उत्सव धूमधाम से मनाते हैं और पूरे देश में शान से तिरंगा झंडा फहराया जाता है। हम यहाँ बात कर रहें थे। 15 अगस्त, जुमा,इस्लाम और संयोग की।
इस्लामिक दुनिया मे जुमा का महत्व।
इस्लामिक दुनिया और परंपरा में भी जुमा के दिन क्स महत्वपूर्ण स्थान है इसे हर हफ्ते का ईद माना जाता है। कुरान में “अल-जुमा” नामक अध्याय में जुमा को इबादत के लिए सबसे पवित्र दिन के रूप में महत्व दिया गया है। जुमा का अर्थ है एकत्र होने का दिन। इस दिन सभी मुसलमान मस्जिदों में एकत्रित होकर एक साथ नमाज पढ़ते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं। ये मान्यता है कि इस दिन की दुआ को अल्लाह जरूर सुनता है। इस्लामिक हिस्ट्री के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि जुमा के दिन दुनियां के पहले इंसान और पैगम्बर आदम अलैहिस्लाम को अल्लाह के द्वारा बनाया गया था और जुमा के दिन ही धरती पर भेजा गया था। पहले पैगंबर आदम की वेसाल (मृत्यु) भी(जुमा) को हुई थी।
जुमा का क्या महत्व है ? इसे सभी मुस्लिम धर्म को मानने वाले बाखूबी जानते है। आखरी पैगंबर रसूल अल्लाह का कहना है कि अपने मुल्क से प्यार करना ईमान का हिस्सा है। इसलिए हर भारतीय की तरह मुसलमान भी अपने मुल्क हिंदुस्तान से दिलो जान से मोहब्बत करता है।
स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त और जुम्मा का अद्भुत हुआ दिलचस्प व महत्व।
जुमा का दिन हर मुसलमान के लिए खास दिन होता है और अगर उस दिन जश्ने ए आजादी का पर्व 15 अगस्त पड़ जाए तो डबल खास हो जाता है। 15 अगस्त 1947 जुमा के दिन मुल्क आजाद हुवा था और आज 79 वां जश्न भी 2025 मे जुमा को मनाया जा रहा है। शुक्रवार होने के कारण यह दिन और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
आइए जानते हैं कि सन 1947 से लेकर 2025 तक कितने बार जुमा को जश्ने ए आजादी का पर्व मनाया गया।
15 अगस्त 1947 दिन जुमा (शुक्रवार)था,
15 अगस्त 1958 दिन जुमा था,
15 अगस्त 1969 दिन जुमा था,
15 अगस्त 1975 दिन जुमा था,
15 अगस्त 1986 दिन जुमा था,
15 अगस्त 1997 दिन जुमा था,
15 अगस्त 2003 दिन जुमा था,
15 अगस्त 2014 दिन जुमा था,
15 अगस्त 2025 दिन जुमा था।
इस प्रकार सन 1947 से लेकर आज 2025 तक कुल 9 बार जश्ने आज़ादी का पर्व 15 अगस्त जुमा को हुआ है। हैं न अदभुत और दिलचस्प संयोग।
जुमा के दिन होने वाले ऐतिहासिक तथ्यों की बात करें तो इस महत्वपूर्ण आंदोलन का उल्लेख करना बनता है
हिंदुस्तान की आजादी के बाद और आजादी की लड़ाई के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई है संयोग से इनमे से कुछ घटनाएं जुमा के दिन हुई है। 8 अगस्त 1942 जुमा के दिन ही महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का नारा दिया था और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की थी, जिसे “भारत छोड़ो आंदोलन” कहा जाता है।
इस प्रकार, 15 अगस्त और जुमा का अद्भुत और दिलचस्प संयोग भारतीय इतिहास में दर्ज एक महत्वपूर्ण दिन हो गया है, जो हमें स्वतंत्रता के महत्व और इस्लामिक परंपरा के महत्व की याद दिलाता है। अंत में एक बात और बताते चलें कि अद्भुत संयोग के हिसाब से जुमा और जश्ने आज़ादी का पर्व एक साथ 15 अगस्त 2031 को मनाया जायगा।
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अफरोज खान पत्रकार
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